राधा का प्रेम गीत,
राधा विरह गीत,
Ai द्वारा गाया गया राधा कृष्ण गीत।
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कृष्णा कहाँ हो तुम? कहाँ हो मोहन? कृष्णा कृष्णा....
कृष्णा कहाँ हो तुम? कहाँ हो मोहन?
राधा का मन है व्याकुल, है ये तड़पन!
वृन्दावन की गलियाँ सूनी, जमुना तट भी खाली,
बाँसुरी की धुन बिन तेरे, हर पल है मन उदासी.
गोपियाँ पूछें हरदम मुझसे, "राधा, श्याम कहाँ है?"
कैसे बताऊँ उनको, मेरा चैन कहाँ है?
कृष्णा... कृष्णा... क्यों हो दूर तुम?
कृष्णा कहाँ हो तुम? कहाँ हो मोहन?
कदम्ब की छाया भी अब तो, मुझको नहीं भाती,
हर पत्ते पर तेरा चेहरा, आँखें मेरी पाती.
मक्खन-मिश्री भी फीकी लागे, बिन तेरे कान्हा,
बिरहा की अग्नि में जलती, मैं हूँ अकेली राधा.
मोहन... मोहन... आओ लौट तुम!
कृष्णा कहाँ हो तुम? कहाँ हो मोहन?
हर रात सपने में आओ, पर आँख खुले तो तुम नहीं,
ये दिल मेरा हर पल पुकारे, "कहाँ छिपे हो तुम कहीं?"
प्रेम की डोरी क्यों तोड़ी तुमने, ओ मेरे प्रियतम?
कब तक यूँ तड़पेगी राधा, ओ मेरे बालम?
कृष्णा... कृष्णा... दे दो दर्शन!
कृष्णा कहाँ हो तुम? कहाँ हो मोहन?
सूनी अखियाँ, प्यासी रूह, बस एक झलक को तरसे,
कब आएगा वो दिन जब, तू आएगा मेरे दर पे?
कृष्णा... कृष्णा... मदन मोहन,
राधा की पुकार सुन ले, मेरे जीवन!
कृष्णा कहाँ हो तुम? कहाँ हो मोहन? कृष्णा कृष्णा....
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